श्री हनुमान आरती — ऑडियो (Hanuman Aarti Audio)

इस पृष्ठ पर “आरती कीजै हनुमान लला की” का सम्पूर्ण ऑडियो उपलब्ध है। आप इसे सुनकर आरती में सम्मिलित हो सकते हैं। आरती का पूरा लिखित पाठ हिंदी में नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध है।

हनुमान आरती — संक्षिप्त परिचय

आरती पूजा का समापन-अंग है, जिसमें दीप प्रज्वलित कर इष्ट देव की स्तुति गाई जाती है। “आरती कीजै हनुमान लला की” हनुमान जी की सबसे प्रचलित आरती है।

इसमें हनुमान जी के पराक्रम, लंका-प्रसंग और भक्तों के संकट हरने वाले स्वरूप का वर्णन है। मंदिरों में यह प्रायः संध्या आरती के समय गाई जाती है।

आरती कब और कैसे करें

आरती सामान्यतः पूजा के अन्त में की जाती है। दीपक जलाकर उसे इष्ट देव के समक्ष घुमाते हुए आरती गाई जाती है, और अन्त में सभी उपस्थित जन आरती लेते हैं।

श्री सिद्धबली बाबा धाम में मंगला आरती प्रातः 5:00 बजे और संध्या आरती सायं 6:30 बजे होती है। घर पर आप ऊपर दिया ऑडियो चलाकर साथ-साथ गा सकते हैं।

संबंधित पाठ एवं संसाधन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी की सबसे प्रचलित आरती कौन-सी है?
“आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की” — यही हनुमान जी की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती है।
आरती किस समय की जाती है?
आरती पूजा के अन्त में की जाती है। मंदिरों में प्रायः प्रातःकाल मंगला आरती और सायंकाल संध्या आरती होती है।
मंदिर में आरती का समय क्या है?
श्री सिद्धबली बाबा धाम में मंगला आरती प्रातः 5:00 बजे तथा संध्या आरती सायं 6:30 बजे होती है।
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