सांवेर की धरती – भजन (Sanwer ki Dharti)

यह एक भक्ति भजन है। भजन भक्ति और स्मरण का सरल माध्यम है, जिसे भक्त किसी भी समय गा सकते हैं। सम्पूर्ण भजन नीचे पढ़ें।

सांवेर की धरती - भजन (Sanwer ki Dharti)

सांवेर की धरती
सांवेर की धरती हनुमत साजे, चले है इनकी मर्जी
सांवेर की धरती पाताल में जाकर जब बजरंग, अहिरावन राज मिटाते है
दिल बाग़ बाग़ हो जाता है, जब राम हृदय मुस्काते है
सुन के पतन की आवाजे, सुन के पतन की आवाजे,
यु लगे कही विध्वंस जगे
अरे राम लखन संग आते ही, सेना के मन संग हर्ष जगे ॥

बजरंग बाबा की यह प्रतिमा, यहाँ उल्टा दर्शन देती है
गम कोसो दूर हो जाता है. कष्ट और पीड़ा हर लेती है, ओ….
सुन जयसियाराम के नारों से, सुन जयसियाराम के नारों से
नगर, गगन, पूरा जगे
सांवेर नगर की यह भूमि, इंदौर उज्जैन के मध्य बसे

सांवेर की धरती

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श्री सिद्धबली बाबा धाम, कोटद्वार

दर्शन समय: प्रतिदिन प्रातः 5:00 – दोपहर 2:00 तथा अपराह्न 3:00 – रात्रि 8:00

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