विश्वकर्मा आरती (Vishwakarma Aarti)

यह विश्वकर्मा आरती का सम्पूर्ण हिन्दी पाठ है। आरती पूजा के समापन पर दीप जलाकर गाई जाती है।

विश्वकर्मा आरती (Vishwakarma Aarti) 1

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

आदि सृष्टि मे विधि को,
श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग में,
ज्ञान विकास किया ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई ।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःखा कीना ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

जब रथकार दंपति,
तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत सगरी हरी ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
सकल रूप साजे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

श्री विश्वकर्मा की आरती,
जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी,
सुख संपति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥

सम्बन्धित पाठ

→ भक्ति संग्रह — सभी देवी-देवता के पाठ देखें

श्री सिद्धबली बाबा धाम, कोटद्वार

दर्शन समय: प्रतिदिन प्रातः 5:00 – दोपहर 2:00 तथा अपराह्न 3:00 – रात्रि 8:00

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