माँ महाकाली – जय काली कंकाल मालिनी! (Maa Maha Kali Jai Kali Kankal Malini)
चालीसा॥ दोहा ॥जय जय सीताराम के मध्यवासिनी अम्ब,देहु दर्श जगदम्ब अब करहु न मातु विलम्ब ॥जय तारा जय कालिका जय […]
॥ दोहा ॥जय जय सीताराम के मध्यवासिनी अम्ब,देहु दर्श जगदम्ब अब करहु न मातु विलम्ब ॥जय तारा जय कालिका जय […]
वैष्णो चालीसा एक भक्ति गीत है जो वैष्णो माता पर आधारित है। ॥ दोहा ॥गरुड़ वाहिनी वैष्णवी,त्रिकुटा पर्वत धाम।काली, लक्ष्मी,
॥दोहा॥जयकाली कलिमलहरण,महिमा अगम अपार ।महिष मर्दिनी कालिका,देहु अभय अपार ॥॥ चौपाई ॥अरि मद मान मिटावन हारी ।मुण्डमाल गल सोहत प्यारी
॥ दोहा ॥नमो नमो विन्ध्येश्वरी,नमो नमो जगदम्ब ।सन्तजनों के काज में,करती नहीं विलम्ब ॥जय जय जय विन्ध्याचल रानी।आदिशक्ति जगविदित भवानी
॥ दोहा ॥श्री शनिश्चर देवजी,सुनहु श्रवण मम् टेर।कोटि विघ्ननाशक प्रभो,करो न मम् हित बेर॥ ॥ सोरठा ॥तव स्तुति हे नाथ,जोरि
॥ दोहा ॥जैसे अटल हिमालय,और जैसे अडिग सुमेर ।ऐसे ही स्वर्ग द्वार पे,अविचल खडे कुबेर ॥विघ्न हरण मंगल करण,सुनो शरणागत
॥ दोहा ॥सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश।ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश॥करो कृपा करिवर वदन, जो सरशुती
॥ चौपाई ॥ प्रथमहिं गुरुको शीश नवाऊँ।हरिचरणों में ध्यान लगाऊँ॥गीत सुनाऊँ अद्भुत यार।धारण से हो बेड़ा पार॥ अर्जुन कहै सुनो
॥ दोहा ॥जय जय श्री महालक्ष्मी,करूँ मात तव ध्यान।सिद्ध काज मम किजिये,निज शिशु सेवक जान॥ ॥ चौपाई ॥नमो महा लक्ष्मी
॥ दोहा ॥मैं हूँ बुद्धि मलीन अति ।श्रद्धा भक्ति विहीन ॥करूँ विनय कछु आपकी ।हो सब ही विधि दीन ॥
॥ माँ अन्नपूर्णा चालीसा ॥॥ दोहा ॥विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय ।अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय ।
॥ दोहा ॥जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी ।नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी ॥ श्री हरि शीश