नवग्रह चालीसा (Navgrah Chalisa)
चालीसा॥ दोहा ॥श्री गणपति गुरुपद कमल,प्रेम सहित सिरनाय ।नवग्रह चालीसा कहत,शारद होत सहाय ॥ जय जय रवि शशि सोम बुध,जय […]
॥ दोहा ॥श्री गणपति गुरुपद कमल,प्रेम सहित सिरनाय ।नवग्रह चालीसा कहत,शारद होत सहाय ॥ जय जय रवि शशि सोम बुध,जय […]
॥ दोहा॥विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय । ॥ चौपाई ॥नमो विष्णु भगवान
शिव ही बसे है कण कण में,केदार हो या काशी,द्वादश ज्योतिर्लिंग है,हर दिशा में है कैलाशी,शिव ही बसे हैं कण
माँ की लाल रे चुनरिया,देखो लहर लहर लहराए,माँ की नाक की नथनिया,दमदम दमदम दमकी जाए,माँ की लाल रे चुनरियाँ,देखो लहर
भक्ति भारत का 101वाँ भजन.. काशी वाले देवघर वाले, भोले डमरू धारी।खेल तेरे हैं निराले, शिव शंकर त्रिपुरारी। जयति जयति
चंदन है इस देश की माटी,तपोभूमि हर ग्राम है ।हर बाला देवी की प्रतिमा,बच्चा बच्चा राम है ॥ हर शरीर
हम हार मान ने वाले इंसान नहीं है,जो पीठ दिखा कर भागे वो बेजान नहीं है,सुर वीरो की भूमि हम
यह भजन 15वीं सदी में गुजराती भक्तिसाहित्य के श्रेष्ठतम कवि नरसी मेहता द्वारा मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया है। यह भजन
वैदिक काल से राष्ट्र या देश के लिए गाई जाने वाली राष्ट्रोत्थान प्रार्थना है। इस काव्य को वैदिक राष्ट्रगान भी
है नया ओज है नया तेज,आरंभ हुआ नव चिंतनविराट भारत विशाल भारत,कर रहा नवयुग का अभिनंदन हर-हर में घर-घर में
झण्डा ऊँचा रहे हमाराविजयी विश्व तिरंगा प्याराझण्डा ऊँचा रहे हमाराविजयी विश्व तिरंगा प्यारा सदा शक्ति बरसाने वालाप्रेम सुधा बरसाने वालावीरों
भारत है पहचान मेरी और तिरंगा शान मेरी,दुनिया में सबसे न्यारा मुझे देश जान से प्यारा है,बस ये ही स्वर्ग