आरती

विन्ध्येश्वरी आरती: सुन मेरी देवी पर्वतवासनी (Sun Meri Devi Parvat Vasani)

आरती

भक्त इन पंक्तियां को स्तुति श्री हिंगलाज माता और श्री विंध्येश्वरी माता की आरती के रूप मे प्रयोग करते हैं: सुन मेरी देवी पर्वतवासनी […]

अहोई माता आरती (Ahoi Mata Aarti)

आरती

जय अहोई माता,जय अहोई माता ।तुमको निसदिन ध्यावत,हर विष्णु विधाता ॥ॐ जय अहोई माता ॥ ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला,तू ही है

आरती: ॐ जय महावीर प्रभु (Om Jai Mahavir Prabhu)

आरती

ॐ जय महावीर प्रभु,स्वामी जय महावीर प्रभु ।कुण्डलपुर अवतारी,चांदनपुर अवतारी,त्रिशलानंद विभु ॥ सिध्धारथ घर जन्मे,वैभव था भारी ।बाल ब्रह्मचारी व्रत,पाल्यो

आरती कुंजबिहारी की (Aarti Kunj Bihari Ki)

आरती

आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गले में बैजंती माला,बजावै मुरली

श्री कुबेर आरती (Shri Kuber Aarti)

आरती

भारत के सबसे बड़े त्यौहार दीपावली का शुभ आरंभ धनतेरस से होता है, धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर एवं श्री

विश्वकर्मा आरती (Vishwakarma Aarti)

आरती

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा ।सकल सृष्टि के करता,रक्षक स्तुति धर्मा ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,जय श्री विश्वकर्मा ।

श्री चित्रगुप्त जी की आरती – श्री विरंचि कुलभूषण (Shri Chitragupt Aarti – Shri Viranchi Kulbhusan)

आरती

श्री विरंचि कुलभूषण,यमपुर के धामी ।पुण्य पाप के लेखक,चित्रगुप्त स्वामी ॥ सीस मुकुट, कानों में कुण्डल,अति सोहे ।श्यामवर्ण शशि सा

गौमता आरती (Shri Gaumata Aarti)

आरती

श्री गौमता जी की आरतीआरती श्री गैय्या मैंय्या की,आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥ अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनि,अविचल अमल मुक्तिपददायिनि ।सुर

भगवद्‍ गीता आरती (Aarti Shri Bhagwat Geeta)

आरती

जय भगवद् गीते,जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणि,सुन्दर सुपुनीते ॥ कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,कामासक्तिहरा ।तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,विद्या ब्रह्म परा ॥जय भगवद् गीते…॥ निश्चल-भक्ति-विधायिनि,निर्मल मलहारी ।शरण-सहस्य-प्रदायिनि,सब विधि सुखकारी

कार्तिकेय आरती (Kartikeya Aarti)

आरती

जय जय आरती वेणु गोपालावेणु गोपाला वेणु लोलापाप विदुरा नवनीत चोरा जय जय आरती वेंकटरमणावेंकटरमणा संकटहरणासीता राम राधे श्याम जय

दत्ताची आरती (Datta Aarti)

आरती

त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।नेती नेती शब्द न ये अनुमाना ॥सुरवर मुनिजन योगी समाधी न

Scroll to Top