शिव ही बसे है कण कण में: भजन (Shiv Hi Base Hai Kan Kan Mein)
भजनशिव ही बसे है कण कण में,केदार हो या काशी,द्वादश ज्योतिर्लिंग है,हर दिशा में है कैलाशी,शिव ही बसे हैं कण […]
शिव ही बसे है कण कण में,केदार हो या काशी,द्वादश ज्योतिर्लिंग है,हर दिशा में है कैलाशी,शिव ही बसे हैं कण […]
माँ की लाल रे चुनरिया,देखो लहर लहर लहराए,माँ की नाक की नथनिया,दमदम दमदम दमकी जाए,माँ की लाल रे चुनरियाँ,देखो लहर
भक्ति भारत का 101वाँ भजन.. काशी वाले देवघर वाले, भोले डमरू धारी।खेल तेरे हैं निराले, शिव शंकर त्रिपुरारी। जयति जयति
चंदन है इस देश की माटी,तपोभूमि हर ग्राम है ।हर बाला देवी की प्रतिमा,बच्चा बच्चा राम है ॥ हर शरीर
हम हार मान ने वाले इंसान नहीं है,जो पीठ दिखा कर भागे वो बेजान नहीं है,सुर वीरो की भूमि हम
यह भजन 15वीं सदी में गुजराती भक्तिसाहित्य के श्रेष्ठतम कवि नरसी मेहता द्वारा मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया है। यह भजन
वैदिक काल से राष्ट्र या देश के लिए गाई जाने वाली राष्ट्रोत्थान प्रार्थना है। इस काव्य को वैदिक राष्ट्रगान भी
है नया ओज है नया तेज,आरंभ हुआ नव चिंतनविराट भारत विशाल भारत,कर रहा नवयुग का अभिनंदन हर-हर में घर-घर में
झण्डा ऊँचा रहे हमाराविजयी विश्व तिरंगा प्याराझण्डा ऊँचा रहे हमाराविजयी विश्व तिरंगा प्यारा सदा शक्ति बरसाने वालाप्रेम सुधा बरसाने वालावीरों
भारत है पहचान मेरी और तिरंगा शान मेरी,दुनिया में सबसे न्यारा मुझे देश जान से प्यारा है,बस ये ही स्वर्ग
भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित था। यह वन्दे मातरम गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमेत्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम् ।महामंगले पुण्यभूमे त्वदर्थेपतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ॥१॥ प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्रांगभूताइमे सादरं त्वां नमामो